गुरूवार, अक्टूबर 21, 2021
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Ram Mandir : राम जन्मभूमि की जमीन पर फैलाए गए झूठ की सच्चाई

17 सितंबर 2019 को कुसुम पाठक ने सुल्तान अंसारी और अन्यों को तब के बाजार भाव 2 करोड़ में वह जमीन बेचने का करार किया। जिसके लिए 50 लाख बयाना दिया गया। बाकी के 1.5 करोड़ 3 साल में देने का करार हुआ। 2019 के करार के चलते जब तक बाकी के 1.5 करोड़ न दिए जाए तब तक वह जमीन आगे नहीं बेची जा सकती थी।

जिस कारण 18 मार्च 2021 के दिन बकाया 1.5 करोड़ दे के जमीन को बैनामा कराया गया और कुसुम पाठक एवं सुल्तान अंसारी के बीच 2 करोड़ में जमीन खरीद का विक्रय विलेख हुआ।

उसके बाद सुल्तान अंसारी ने वह जमीन मार्च 2021 के बाजार भाव 18.5 करोड़ में राम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट को बेची। यह जमीन रेलवे स्टेशन के पास बहुत प्रमुख स्थान पर है।

9 नवंबर 2019 को श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय आने के बाद अयोध्या में भूमि खरीदने के लिए देश के असंख्य लोग आने लगे। उत्तर प्रदेश सरकार अयोध्या के सर्वांगीण विकास के लिए बड़ी मात्र में भूमि खरीद रही है, इस कारण अयोध्या में एकाएक जमीनों के दाम बढ़ गए।

कुछ लोग राम मंदिर के निर्माण को बदनाम के लिए इस सामान्य कानूनी प्रक्रिया को स्कैम का नाम दे रहे है।

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