यूरोपीय छाया से मुक्त करती है नई शिक्षा नीति मिन्टो हाॅल में म.प्र. प्रेस क्लब ने किया शिक्षा चैपाल का आयोजन

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वर्तमान शिक्षा नीति औपनिवेशिक काल की देन है। उस समय इसके उद्देश्य बहुत सीमित थे। आजादी के बाद शिक्षा नीति में कुछ बदलाव जरूर हुये लेकिन इन पर भी मैकाले की छाया साफ दिखाई देती थी। लेकिन नई शिक्षा नीति राष्ट्र की आकांक्षा को पूरी करने वाली है, यह हममंे आत्म गौरव का भाव जगाती है। यदि हम यह कहे कि यह नीति यूरोप की छाया से पूर्णतः मुक्त है तो इसमें कतई अतिश्योक्ति नहीं है। इस आशय का विचार आज मिन्टो हाॅल में सुनाई दिया। मौका था म.प्र. प्रेस क्लब द्वारा नई शिक्षा नीति पर आधारित विचार सत्र ”शिक्षा चैपाल“ के आयोजन का। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी एवं माध्यमिक शिक्षा मण्डल के अध्यक्ष राधेश्याम जुलानिया कर रहे थे जबकि राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के अध्यक्ष एवं वरिष्ठ शिक्षाविद डाॅ. गोविन्द प्रसाद शर्मा बतौर मुख्य वक्ता उपस्थित थे। विशेष अतिथि के रूप में वरिष्ठ शिक्षाविद डाॅ. अशोक ग्वाल, महर्षि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. भुवनेश शर्मा एवं कौटिल्य अकेदमी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाॅ. मनमोहन जोशी मौजूद थे। अपने वक्तव्य में मुख्य वक्ता डाॅ. गोविन्द शर्मा ने कहा कि नई शिक्षा नीति हममे राष्ट्रवाद का भाव जगाती है, यह राष्ट्रीय आकांक्षा को पूरा करने वाली है। आजादी के बाद बनी शिक्षा नीति में यूरोपीय दृष्टि थी। समय-समय पर इसमें बदलाव जरूर हुये लेकिन यह मात्र पेचवर्क ही कहे जायेंगे। इस शिक्षा नीति में भारतीय दृष्टि है, यह हमारी पारम्परिक चेतना को विकसित करती है। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में श्री राधेश्याम जुलोनिया ने आंकड़ों की मदद से वर्तमान शिक्षा की जमीनी हकीकत से परिचित कराया, उन्होंने शिक्षा की स्थिति एवं संसाधनों पर प्रकाश डालते हुये कहा कि यह आलोचना की नहीं बल्कि आत्मावलोकन की बात है। श्री जुलानिया ने कहा कि नई शिक्षा नीति परीक्षाओं की बाध्यता तथा पाठ्य सामग्री के चयन आदि में काफी रियायतें देती हैं जिससे शिक्षा में सुधार के रास्ते खुलते है। उन्होंने नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन तथा अन्य पहलुओं पर इस तरह के शिक्षा सत्र आयोजन किये जाने की जरूरत बताते हुये प्रेस क्लब के इस आयोजन की सराहना की। कार्यक्रम के विशेष अतिथि अशोक ग्वाल ने कहा कि यहाँ इस तरह स्कूली शिक्षा पर बात हो रही है उसी तरह उच्च शिक्षा की स्थिति पर भी बाते होना चाहिए। वहीं डाॅ. भुवनेश शर्मा का कहना था कि शिक्षा बाहरी ज्ञान नहीं बल्कि भीतरी ज्ञान देने वाली होना चाहिए। नई शिक्षा नीति में भारत के पारम्परिक ज्ञान का समावेश है जो इस कमी को पूरी कर सकेगा। कौटिल्य अकेदमी डाॅ. मनमोहन जोशी का कहना था कि नई शिक्षा नीति के मसौदे में कई बाते स्पष्ट नहीं होती इस पर भी चर्चा की जाना चाहिए ताकि शिक्षा नीति का ड्राफ्ट और पुष्ट हो सके। चर्चा में हस्तक्षेप करते हुये वरिष्ठ पत्रकार राकेश दुबे ने शिक्षा नीति के क्रियान्वयन में आने वाली जमीनी वास्तविकताओं की तरफ ध्यान खीचा। आरंभ में प्रेस क्लब के अध्यक्ष डाॅ. नवीन आनंद जोशी ने स्वागत वक्तव्य देते हुये नई शिक्षा नीति के लागू करने की तैयारियों तथा चुनौतियों को सामने लाना तथा इस पर एक वैचारिक वातावरण तैयार करना इस कार्यक्रम का उद्देश्य है। प्रेस क्लब द्वारा किये जाने वाले आयोजन पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इसके पूर्व में कोरोना को लेकर भी प्रदेश भर में आयोजन किये गये थे जिसके अच्छे परिणाम सामने आये हैं। इसके पूर्व प्रधानमंत्री द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय में नई शिक्षा नीति पर दिये वक्तव्य को शार्ट फिल्म के माध्यम से प्रस्तुत किया। अतिथियों का स्वागत नितिन वर्मा, जसविन्दर ंिसंह तथा महेन्द्र शर्मा आदि ने किया। कार्यक्रम का संचालन प्रेस क्लब के अजय प्रताप सिंह ने किया। इस अवसर पर शहर के शिक्षाविद तथा पत्रकारिता जगत से जुड़े लोग मौजूद थे।

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