रविवार, अगस्त 1, 2021
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नेमावर हत्याकांड : नही निकला जातिवादी, लव एंगल आया सामने

नेमावर के एक ही परिवार के 5 व्यक्तियों के हृदयविदारक हत्याकांड में रोजाना नई-नई परते खुलती जा रही हैं। सबसे पहले 17 मई 2021 को मृतिका की पुत्री भारती ने नेमावर पुलिस को एक आवेदन दिया था, जिसके आधार पर गुमशुदगी का प्रकरण (15/2021) दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। इसी बीच मृतिका की भतीजी नीतू द्वारा मृतक रुपाली पर अपने दो बच्चे पवन ओर पूजा के अपहरण की आशंका में आपराधिक प्रकरण क्रमांक (132/2021) दर्ज करवाया गया।

नेमावर पुलिस ने इस विषय को गंभीरता एवं संवेदनशीलता से लिया और हर स्तर पर पड़ताल की। अंतत्वोगत्वा मुखबिर से सूचना मिली कि यह पूरा मामला प्रेम प्रसंग से जुड़ा हुआ है और सम्भवतः प्रेमी द्वारा ही पूरे परिवार की हत्या कर दी गई है। उक्त इनपुट ओर साइबर डाटा के आधार पर पुलिस के सामने चौकाने वाला नाम, तीन बार कांग्रेस शहर अध्यक्ष रहे वरिष्ठ नेता के पोते सुरेंद्र सिंह चौहान का नाम सामने आया। 

पहले तो सुरेंद्र झूठ बोलता रहा लेकिन जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो सुरेंद्र ने अपने भाई वीरेंद्र, शहर कांग्रेस उपाध्यक्ष बबलू तिवारी के बेटे विवेक तिवारी, उसके आदिवासी मित्र मनोज कोरकू ओर करण कोरकू सहित 07 आरोपियों द्वारा किए गए हत्याकांड को कबूल किया गया। आरोपी सुरेंद्र ने अपने इकबालिया बयान में पुलिस को बताया कि रुपाली उसकी प्रेमिका थी ओर वह उसकी मंगेतर दिव्यांशी को लेकर सोश्यल मीडिया पर लगातार अनर्गल पोस्ट डाल रही थी, साथ ही शादी करने का दबाव भी बना रही थी।

इसी से परेशान हो कर सुरेंद्र ने अपने 6 अन्य साथियों के साथ मिल कर पहले परिवार के सभी उपस्थित 5 सदस्यों के विभत्स्य हत्याकांड को अंजाम दिया और फिर अपने ही खेत के पास 12 फिट गहरे गड्ढे में यूरिया ओर नमक डाल कर गाढ़ दिया। इसके बाद सुरेंद्र ने रुपाली का फोन अपने खंडवा निवासी दोस्त राकेश निमौरे को दे दिया और उससे खंडवा एवं आस-पास की लोकेशन से सोश्यल मीडिया पर मैसेज ओर पोस्ट करवा कर पुलिस तथा परिवार को भ्रमित करता रहा। 

नेमावर पुलिस द्वारा त्वरित कार्यवाही करते हुए पूरे मामले का पटाक्षेप कर दिया गया है, साथ ही सभी 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। शासन द्वारा परिवार को लगभग 48 लाख रुपये मुआवजे के रूप में दिए गए हैं। पुलिस को आशंका है कि हत्या से पूर्व आरोपियों ने युवतियों के साथ दुराचार भी किया होगा, क्योकि पुलिस को रुपाली, दिव्या ओर पूजा के शवों पर कपड़े नही मिले। हालांकि आरोपियों ने दुराचार द्वारा दुराचार की बात अब तक स्वीकार नही की गई है।

कुछ मीडिया संस्थानों ने गैरजिम्मेदाराना तरीके से बिना तथ्य और सत्य को जाने-परखे इस घटना को जातिवाद, दलित विरुद्ध स्वर्ण ओर हिंदुत्व से सम्बंधित बनाने का भरसक प्रयास किए। लेकिन स्वयं वंचित समूह के द्वारा अब इन फर्जी विमर्शों का खंडन किया जा रहा है जबकि सर्व समाजों द्वारा आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग की जा रही है।

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