हनी ट्रैप कांड की पेन ड्राइव को लेकर दर्ज नहीं हो सका कमलनाथ का बयान

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मध्य प्रदेश में करीब डेढ़ साल पहले सामने आए कुख्यात हनी ट्रैप कांड की पेन ड्राइव को लेकर विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जारी नोटिस पर पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ का बयान बुधवार को दर्ज नहीं हुआ। कमलनाथ के एक सहयोगी के मुताबिक वह अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत भोपाल से बाहर होने के कारण एसआईटी के सामने अपना बयान दर्ज नहीं करा सके। 

प्रदेश कांग्रेस समिति के अध्यक्ष कमलनाथ के मीडिया समन्वयक नरेंद्र सलूजा ने बताया, कमलनाथ की ओर से एसआईटी को लिखित सूचना दी जा चुकी है कि वह अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत बुधवार को दिल्ली में रहने के चलते बयान नहीं दर्ज करा सकेंगे। एसआईटी में शामिल एक आला अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि कमलनाथ के भोपाल में बुधवार को उपलब्ध नहीं होने के चलते हनी ट्रैप कांड की पेन ड्राइव को लेकर उनका बयान दर्ज नहीं किया जा सका। अधिकारी ने बताया कि बयान दर्ज कराने के लिए फिलहाल कमलनाथ को कोई नयी तारीख नहीं दी गई है।

गौरतलब है कि एसआईटी ने कमलनाथ को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) के तहत पिछले हफ्ते नोटिस भेजा था। इसमें कहा गया था कि वह दो जून (बुधवार) को दोपहर 12:30 बजे भोपाल के श्यामला हिल्स स्थित अपने निवास में उपस्थित रहें और एसआईटी के एक निरीक्षक को बयान दर्ज कराते हुए पेन ड्राइव या सीडी का अत्यंत महत्वपूर्ण सबूत सौंपें। एसआईटी के नोटिस के मुताबिक कमलनाथ ने 21 मई को एक ऑनलाइन पत्रकार वार्ता में कथित रूप से कहा था कि हनी ट्रैप प्रकरण की पेन ड्राइव उनके पास है।

इस नोटिस को लेकर प्रतिक्रिया मांगे जाने पर कमलनाथ ने रविवार को मीडिया से कहा था, (हनी ट्रैप कांड की) यह पेन ड्राइव मेरे पास कहां है? यह तो आपमें (पत्रकारों) से बहुत लोगों के पास है। यह पेन ड्राइव तो पूरे प्रदेश में घूम रही है। गौरतलब है कि हनी ट्रैप गिरोह की पांच महिलाओं और उनके ड्राइवर को भोपाल और इंदौर से सितंबर 2019 में गिरफ्तार किया गया था। उस समय मध्य प्रदेश में कमलनाथ नीत कांग्रेस सरकार थी। फिलहाल शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई में भाजपा राज्य की सत्ता में है। 

पुलिस ने हनी ट्रैप मामले में इंदौर की एक स्थानीय अदालत में 16 दिसंबर 2019 को पेश आरोप पत्र में कहा था कि यह संगठित गिरोह मानव तस्करी के जरिये भोपाल लाई गई युवतियों के इस्तेमाल से धनवान लोगों और ऊंचे ओहदों पर बैठे लोगों को अपने जाल में फांसता था। फिर खुफिया कैमरे से बनाए गए वीडियो, सोशल मीडिया चैट के स्क्रीनशॉट आदि आपत्तिजनक सामग्री के आधार पर उन्हें ब्लैकमेल करता था। 

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