मृत नाबालिग के साथ हाथरस जैसी अमानवीयता, मां घर पर बेटी का इंतजार करती रही और पुलिस शव को सीधे ले गई श्मशान

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साल 2020 की वह रात कौन भूलेगा जिसमें यूपी के हाथरस में हुए दुष्कर्म कांड की पीड़िता के साथ पुलिस व प्रशासन ने कैसी बेरहमी की थी। बिलकुल उसी तरह एमपी पुलिस ने प्यारे मियां यौन शोषण केस की शिकार नाबालिग बेटी और उसके परिवार के साथ किया। नाबालिग की ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियां खा लेने के बाद बुधवार को मृत्यु हो गई थी। 

नाबालिग की मां घर पर बेटी का इंतजार करती रही, लेकिन पुलिस शव को सीधे श्मशान लेकर चली गई, वहीं पुलिस इस सब से इनकार कर रही है कि, हमने परिजनों को बिना बताए शव को अंतिम संस्कार स्थल पर पहुंचा दिया। गुरुवार को पुलिस की निगरानी में दोपहर 1:30 बजे उसका भदभदा विश्राम घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।

आपको बता दें कि, भोपाल के हाई प्रोफाइल प्यारे मियां यौन शोषण केस की शिकार नाबालिग ने ज्यादा मात्रा में नींद की गोलियां खा ली थी, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान बुधवार को उसकी मृत्यु हो गई थी। दरअसल, बुधवार को बेटी की मौत की खबर मां को इसलिए नहीं दी गई थी कि कहीं उन्हें सदमा न लग जाए। लेकिन मां ने जब बेटी के शव को देखा तो वे स्तब्ध रह गईं। उनकी आंखें खुलीं थीं और जुबां थमी हुई थी। थोड़ी देर बाद वह बेहोश हो गईं। बाद में चेहरे पर पानी के छींटे छिड़के, तब उन्हें होश आया। 

मां ने कहा कि, मेरी बेटी की क्या गलती थी, जो पुलिस व प्रशासन ने उसके साथ अपराधी जैसा व्यवहार किया। बेटी अस्पताल में तड़पती रही, तो भी हमें उससे नहीं मिलने दिया। हम उसकी शादी के सपने संजो रहे थे और हमारे सपने ही उजड़ गए। बेटी को वैदिक रीति-रिवाज के साथ हम विदा नहीं कर पाए। पुलिस पर आरोप है कि पीड़िता की मां और परिजन घर पर बेटी के शव का इंतजार करते रहे, लेकिन पुलिस उन्हें शव सौंपना ही नहीं चाहती थी। 

इस बीच बैरागढ़ एसडीएम मनोज उपाध्याय ने हमीदिया पहुंचकर परिजनों को दो लाख रु. का चेक दिया। इसके बाद माहौल बिगड़ता देख हबीबगंज सीएसपी भूपेंद्र सिंह ने पिता व चाचा को शव वाहन में बैठाकर विश्राम घाट भेज दिया। बाद में क्राइम ब्रांच की एक टीम घर पहुंची और वहां से मृतका की मां और कुछ महिलाओं को गाड़ी में बैठाकर विश्राम घाट ले आई। साथ ही मां ने महिला थाना प्रभारी अजिता नायर, बाल कल्याण समिति के कृपा शंकर चौबे और बालिका गृह की अधीक्षिका अंतोनिया पर बेटी को जबरन गोलियां खिलाने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री से सीबीआई जांच की मांग की।

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