जमानत पर रिहा हुए कंप्युटर बाबा, बोले – सत्य की जीत हुई

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मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के एक आदेश के बाद कम्प्यूटर बाबा को गुरुवार देर शाम केंद्रीय जेल से रिहा कर दिया गया। 54 वर्षीय बाबा को उनके कथित रूप से अवैध आश्रम ढहाए जाने के दौरान एहतियाती कार्रवाई के तहत 11 दिन पहले गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। चश्मदीदों ने बताया कि कम्प्यूटर बाबा रिहाई के बाद शहर के केंद्रीय जेल से अकेले बाहर निकले। जेल परिसर में पहले से एकत्रित समर्थकों ने फूलमाला पहनाकर उनका स्वागत किया। इस दौरान कम्प्यूटर बाबा ने मीडिया के सामने एक पर्चा पढ़ते हुए कहा, “सबसे पहले मैं अपने वकीलों को धन्यवाद देना चाहता हूं..सबको धन्यवाद…भगवान ने सत्य की जीत दी है.”

युगल पीठ ने दिया रिहाई का आदेश

मीडिया के सवालों के जवाब देने से साफ इनकार करते हुए कम्प्यूटर बाबा की पहले से तैयार चारपहिया गाड़ी में सवार हुए और कुछ ही पलों के भीतर जेल से रवाना हो गए। उनके खिलाफ दर्ज आपराधिक प्रकरणों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने हाथ जोड़ते हुए कहा, “मैं कुछ नहीं कहना चाहता.” इससे पहले, उच्च न्यायालय के इंदौर पीठ ने प्रदेश सरकार को गुरुवार को ही निर्देशित किया कि अगर किसी मामले की जांच के संबंध में उसे कम्प्यूटर बाबा की आवश्यकता न हो, तो उन्हें जेल से तुरंत रिहा किया जाए. न्यायमूर्ति एससी शर्मा और न्यायमूर्ति शैलेंद्र शुक्ला ने कम्प्यूटर बाबा की ओर से पेश बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर इस आशय का निर्देश दिया. युगल पीठ ने कहा कि उसके आदेश की प्रति केंद्रीय जेल के अधीक्षक तक तुरंत पहुंचाई जाए।

याचिका पर सुनवाई के दौरान अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्यमित्र भार्गव ने अदालत को बताया कि कम्प्यूटर बाबा को दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 151 (संज्ञेय अपराध घटित होने से रोकने के लिए की जाने एहतियातन गिरफ्तारी) से जुड़े मामले में रिहा करने का आदेश पहले ही दिया जा चुका है। अधिकारियों ने बताया कि इंदौर शहर से सटे जम्बूर्डी हप्सी गांव में सरकारी जमीन पर बने कम्प्यूटर बाबा के कथित रूप से अवैध आश्रम को ढहाए जाने के दौरान बाबा को 8 नवंबर को सीआरपीसी की धारा 151 के तहत ही जेल भेजा गया था।

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