रविवार, अगस्त 1, 2021
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#CabinetReshuffle: ज्योतिरादित्य सिंधिया मोदी कैबिनेट में मिली एंट्री, मिल सकता है यह मंत्रालय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को अपनी टीम का विस्तार किया। नरेंद्र मोदी कैबिनेट विस्तार में सबसे अहम नाम ज्योतिरादित्य सिंधिया का रहा। मोदी कैबिनेट के संभावित नए चेहरों में कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मंत्रिपरिषद की शपथ ग्रहण की है। सिंधिया को केंद्रीय कैबिनेट में रेल मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।

दिल्ली से बुलावा आने पर ज्योतिरादित्य अपना मध्यप्रदेश दौरा बीच में ही छोड़कर राजधानी दिल्ली लौट गए। सिंधिया मंगलवार को महाकाल दर्शन के लिए उज्जैन आए। इस दौरान मीडिया ने उनसे पूछा कि आपको मंत्री पद के लिए दिल्ली बुलाया गया है तो इस पर सिंधिया ने कहा कि मुझे मालूम नहीं, कोई सूचना नहीं है।

सिंधिया के राजनीतिक सफर पर नजर

– हाल ही में कांग्रेस से भाजपा में आए सिंधिया के राजनीतिक सफर की शुरुआत 2002 में हुई।

– साल 2002 में पहली बार सांसद बने ज्योतिरादित्य ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत पिता माधवराव सिंधिया के निधन के बाद की थी।

– 18 सितंबर, 2001 को ज्योतिरादित्य सिंधिया के पिता माधवराव सिंधिया की एक हवाई हादसे में मृत्यु हो गई थी। तब वे गुना से लोकसभा सांसद थे।

– ज्योतिरादित्य ने गुना सीट से पहली बार चुनाव लड़ा और फरवरी 2002 में साढ़े चार लाख से ज्यादा वोटों से जीत हासिल की।

सिंधिया का निजी जीवन और शिक्षा

– माधवराव ने अपने बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया को दून स्कूल में पढ़ने को भेजा था। उन्हें लगता था कि सिंधिया स्कूल ग्वालियर में उनके बेटे को ज्यादा लाड़-प्यार मिलेगा।

– स्कूली शिक्षा पूरी होने पर वे ज्योतिरादित्य को अपने साथ दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज और इंग्लैंड के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी लेकर गए।

– ऑक्सफोर्ड में ज्योतिरादित्य का एडमिशन नहीं हो सका तो अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में उनका एडमिशन कराया।

– साल 1991 में पढ़ाई पूरी करने के बाद ज्योतिरादित्य ने लॉस एंजिल्स में अंतरराष्ट्रीय कंपनी मैरिल लिंच के साथ अपने करियर की शुरुआत की।

– इसके बाद उन्होंने कुछ समय तक न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र संघ में भी काम किया।

– अगस्त, 1993 में भारत लौटने के बाद उन्होंने मुंबई में मॉर्गन स्टेनले कंपनी के लिए भी काम किया।

मध्य प्रदेश में कांग्रेस की राजनीति में सिंधिया घराने का अर्जुन सिंह परिवार से छत्तीस का आंकड़ा रहा है, लेकिन ज्योतिरादित्य ने 2001 में जब कांग्रेस की सदस्यता ली तब अर्जुन सिंह ने उन्हें माधवराव की ऐतिहासिक कलम भेंट की थी। ये वही कलम थी जिससे साल 1979 में माधवराव ने कांग्रेस की सदस्यता फॉर्म पर हस्ताक्षर किए थे। मां की इच्छा के खिलाफ जाकर माधवराव कांग्रेस में शामिल हुए थे।

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