बुधवार, सितम्बर 22, 2021
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राष्ट्रीय गौरव दिवस के रूप में मनाई जाएगी बिरसा मुंडा की जयंती

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े वनवासी कल्याण केंद्र, विश्व हिंदू परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, सेवा भारती, एकल अभियान सहित अन्य संगठन इस बार बिरसा मुंडा की जयंती को राष्ट्रीय गौरव दिवस के रूप में मनाएंगे।

एक सप्ताह तक चलने वाले इस कार्यक्रम को झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, पूर्वोत्तर भारत सहित उन सभी राज्यों में मनाया जाएगा, जहां आदिवासी बहुतायत में रहते हैं। इस अभियान के तहत लोगों को बिरसा मुंडा के जीवन से अवगत कराया जाएगा। 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती है। उससे पहले ही इस अभियान की शुरुआत हो चुकी है।

वनवासी कल्याण केंद्र के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कृपा प्रसाद सिंह ने कहा कि आज भी आदिवासी समाज के साथ-साथ दूसरे लोग भी बिरसा मुंडा के जीवन से पूरी तरह अवगत नहीं हैं। लोगों को बताने की जरूरत है कि कैसे उन्होंने हमेशा अंग्रेजों से लोहा लिया। कष्ट में रहते हुए भी चर्च के खिलाफ अभियान चलाया और कभी भी ईसाई धर्म को स्वीकार नहीं किया। आज जिस तरह से ईसाई मिशनरियां धर्मातरण के कार्य में लगी हैं, उससे बचने के लिए बिरसा मुंडा से सीखने की जरूरत है। बिरसा मुंडा ने समाज को जगाने का काम किया : कृपा प्रसाद सिंह ने कहा कि मिशनरी के लोग वेश बदलकर धर्मातरण के काम में लगे हैं। बिरसा मुंडा ने हमेशा अपने समाज को जगाने का काम किया। धर्म-संस्कृति की रक्षा की।

इस अभियान के तहत जगह-जगह सेमिनार, आदिवासी बहुल गांवों में जाकर बैठकें करना, मोटरसाइकिल रैली निकालना, बच्चों के बीच ऑनलाइन प्रतियोगिता आयोजित करना और 15 नवंबर को जहां भी बिरसा मुंडा की प्रतिमा है, वहां पर आदिवासी समाज के लोगों के साथ समारोह का आयोजन करना है।

कौन हैं बिरसा मुंडा

बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को झारखंड के खूंटी जिले के उलीहातू गांव में किसान के परिवार में हुआ था। एक अक्टूबर 1894 को उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लगान माफी के लिए आंदोलन शुरू किया। ब्रिटिश सरकार ने उन्हें 3 फरवरी 1900 को झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिले के चक्रधरपुर में गिरफ्तार कर लिया। उन्हें दो साल की सजा दी गई थी। नौ जून 1900 को उन्होंने सुबह आठ बजे अंतिम सांसें लीं। कहा जाता है कि अंग्रेजों ने उन्हें जहर देकर मार डाला। झारखंड में बिरसा मुंडा को भगवान की तरह पूजा जाता है।

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